गर्मी ने अभी दस्तक ही दी है लेकिन अभी से 153 जिलों में जल संकट

खबरें अभी तक। सर्दियों के जाने के बाद अब मौसम भी अपने मिज़ाज में गर्मी लाता जा रहा है. ऐसे में पिछले मानसून में बारिश कम होने की वजह से अगले कुछ महीनों में देश के कई हिस्सों में जल संकट गहरा सकता है. आने वाले महीनों में भयंकर गर्मी पड़ेगी. पिछले साल अक्टूबर से मार्च 2018 के मौसम विभाग के आंकड़ों को देखें तो देश के कुछ हिस्सों में अगले कुछ महीनों में पड़ने वाली भीषण गर्मी से उत्पन्न सूखे के हालात की भयावहता नजर आती है. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर 2017 से बारिश की स्थिति संतोषजनक नहीं रही. हालात ये हैं कि 404 जिलों में सूखे की स्थितियां बन गई हैं.

अत्यंत सूखे की कैटेगरी में 140 जिले-

मौसम विभाग के मुताबिक, 404 जिलों में से 140 जिलों में अक्टूबर 2017 से मार्च 2018 की अवधि में अत्यंत सूखा करार दिया गया. 109 जिलों में मामूली सूखा, जबकि 156 जिलों में हल्के सूखे की स्थितियां बताई गईं हैं. आईएमडी डेटा से देशभर में 588 जिलों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि 153 जिले बेहद सूखी श्रेणी में हैं. इन जिलों में जनवरी से मार्च 2018 तक की अवधि में बारिश हुई ही नहीं है. चिंताजनक बात तो यह है कि IMD की मानकीकृत वर्षा सूचकांक (एसपीआई) में गत वर्ष (जून 2017 से) मानसून के महीनों में भी 368 जिलों में हल्के से बहुत सूखे की स्थितियां दर्शायी गई हैं.

ऐसे तय होता है सूखा-

स्टैंडर्ड प्रीसिपीटेशन इंडेक्स (SPI) से मौसम विभाग सूखे की स्थिति को आंकता है. इसे बारिश और सूखा मांपने के लिए +2 और -2 के दो पैमानों का इस्तेमाल होता है. यहां 2 और उससे ज्यादा के स्केल पर चरम नमी को दर्शाता है. वहीं, -2 का स्केल बेहद सूखे की स्थिति को दर्शाता है. अन्य स्थितियों में इनके बीच की सीमाओं को दर्शाती है, इसे गंभीर रूप से गीले से लेकर गंभीर सूखे तक शामिल है. एसपीआई (SPI) को दुनिया भर में बारिश मांपने के लिए एक सटीक उपाय माना गया है. आईएमडी के जलवायु डेटा प्रबंधन और सेवा के प्रमुख पुलक गुहाथुकुता के मुताबिक, यह सामान्य बारिश की तुलना में किसी विशेष स्थान पर सूखापन या नमी की सीमा को दर्शाता है.

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