एक स्कूल जहां खौफ के सायें में होती है पढ़ाई

ख़बरें अभी तक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छी शिक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है और बेहतर शिक्षा के लिए यूपी के प्राथमिक विद्यालयों में करोड़ों रूपए भी केंद्र सरकार दे रही है लेकिन प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही के चलते यूपी के बाराबंकी में एक ऐसा खौफनाक स्कूल हैं जहां की नन्हे- मुन्ने छात्र छात्रायें न पढ़ पा रही है और न शिक्षिका उनको पढ़ा पा रही है. क्योंकि इस स्कूल के आसपास ऐसा नज़ारा है. जिसको देख कर कोई भी बड़े से बड़ा शिक्षाविद और नेता आये तो घबरा जाये.

जी हां ये सरकारी प्राथमिक विद्यालय बाराबंकी जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर बुढ़वल शुगर मिल में स्तिथ है. यहां के नन्हे -मुन्ने छात्र-छात्राये खौफ के साए में अपनी ज़िन्दगी की शुरुआती शिक्षा गृहण कर रहे है. दशकों से चल रहे इस स्कूल में डर से कभी-कभी बच्चे आते है तो कभी शिक्षक.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी के प्राथमिक विद्यालय बुढ़वल शुगर मिल, तहसील रामनगर ज़िला बाराबंकी का है. जहां हर पल बच्चे खौफ के साये में पढ़ाई करते है. सांप और बिछु का डर इन्हें हर वक्त सताया करता है, जिसकी वजह से बच्चे रोज़ स्कूल नहीं आते है. सिर्फ 9 बच्चों का इस स्कूल में दाखिला है उसमे से सिर्फ 5-6 बच्चे ही कभी-कभी विद्यालय आते है.

दरअसल वर्षो से बंद पड़ी बुढ़वाल शुगर मिल में अब घना जंगल हो गया है जब इस विद्यालय की असलियत जानने बुढ़वल शुगर मिल गए तो इस शुगर मिल के जर्जर गेट के अंदर दाखिल होते ही हम लोग दंग रह गए. दाहिने हाथ पर  एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय चल रहा है. जैसे ही स्कूल की तरफ हम लोग आगे बड़े ज़हरीले सापो से सामना हुआ. एक नहीं करीब आधा दर्जन सांप हम लोगों को ज़मीन पर रेंगते हुए दिखाई पड़े. जिसमे कुछ को कैमरे में कैद कर लिया.

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस प्राथमिक विद्यालय में दो अध्यापिकाएं है. जिसमे एक मारे खौफ के कभी कभी आती है और तो दूसरी शिक्षा मित्र है क्योंकि इस विद्यालय में जहरीले सापों ,बंदरो, बिछु और मोर समेत कई जानवरो का डेरा है. इस खौफ से इन बच्चो के मां बाप अपने बच्चों को इस स्कूल में भेजना नहीं चाहता लेकिन मजबूरी में भेजना पड़ता है और जो बच्चे पढ़ने के लिए आना चाहते है. उनको शुगर मिल के चौकीदार, स्कूल की टीचर या रासोइय्या अपनी जमानत में घर से ले कर आती है. इस खौफ में पढ़ाई क्या होती होगी इसका अंदाजा भी आप खुद लगा सकते है कि कक्षा एक से पांच तक के बच्चे सिर्फ एक ही कमरे में पढ़ते है.

यहां क्लास पांच की छात्रा पायल कहती है कि यहां सांप रहते है ,बिछु रहते है और जंगल है इसलिए हम रोज़ आते नहीं है, जंगल बहुत है इसलिए हमारे मम्मी-पापा यहां आने नहीं देते है. मम्मी पापा कहते है मत जाया करो, यहां गार्ड अंकल रहते है वही सांप को मारते है, रोज़ सांप निकलते है यहां, डर लगता है. वहीं क्लास 2 की अंशिका बताती है कि अंकल में रोज़ स्कूल नहीं आती हु यहां सांप रहते है ,इसीलिए हम नहीं आते है. डर लगता है, टीचर जी रोज़ बुलाने जाती है.

आपको बता दे कि ये प्राथमिक विद्यालय एक बी.एल.ओ शिक्षिका और एक शिक्षामित्र के भरोसे चलाया जा रहा है. बी.एल.ओ शिक्षिका सांपो के डर में कभी-कभी विद्यालय आती है मौके पर विद्यालय में मौजूद शिक्षामित्र रागिनी देवी बताती है कि स्कूल में मुझे तीन वर्ष हो गए दहशत के चलते बच्चे स्कूल नही आते है. इसकी सूचना कई बार अधिकारियों को दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई.

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