मिरर्जापुर: एक बार फिर विवादों में महादेव शिशु गृह

ख़बरें अभी तक। महादेव शिशु गृह के बारे में शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले पर जांच के लिए अजय तिर्की सचिव भारत सरकार ने अगस्त में एक पत्र महिला कल्याण व बाल कल्याण विभाग को लिखा। जिस पत्र का संज्ञान लेकर महिला कल्याण और बाल कल्याण विभाग के अपर सचिव रेणुका कुमार ने पूरे मामले में जिला प्रशासन से पांच सितंबर को पत्र भेज कर तीन दिनों के भीतर पूरी स्थिति पर आख्या मांगी। डीएम के पास लखनऊ से पत्र आने के बाद एक बार फिर हड़कंप मचा गया। जिला प्रोवेजनल अधिकार समेत सभी अधिकारी संस्था कि रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी में जुटे है।

दरअसल यह संस्था पहले भी विवादों में रह चुकी है। मगर संस्था से बच्चों के लापता होने की बात को अधिकारी खण्डन कर रहे है। जिला प्रोवेजनल अधिकारी अमरेंद्र कुमार के अनुसार इस संस्था में कुछ 46 बच्चे संस्था के 23 सितम्बर 2014 से शुरू होने से लेकर और 24 फरवरी 2018 को बंद होने तक मौजूद रहे। जिनमे से विभाग द्वारा 23 सितम्बर 2014 को पहला बच्चा संस्था में दिया गया था।

कुल 46 बच्चों में 15 बच्चों को कोर्ट के माध्यम से गोद लिया गया है। इसके साथ 15 बच्चों की मौत संस्था के अंदर हुई है। संस्था से 2 बच्चों को परिवार द्वारा दावा किये जाने के बाद उनके परिवार को सौंप दिया गया है। 24 फरवरी को संस्था के बंद होने के बाद इस संस्था से 9 बच्चों को राजकीय शिशु गृह लखनऊ स्थानांतरित किया गया। इस संस्था के 5 बच्चे अभी भी प्री एडॉप्शन प्रक्रिया में है। इनके गोद लिए जाने की प्रक्रिया कोर्ट में विचाराधीन है।

बता दें कि 10 जनवरी 2018 को इस संस्था में आशीष नाम के एक बच्चे कि बीमारी से मौत होने के बाद शिकायत पर सचिव महिला कल्याण व बाल विकास और तत्कालीन जिला अधिकारी विमल दुबे ने जांच की था। जिस पर वहां पर गंदगी और रख रखाव के उचित प्रबंध नहीं होने कि रिपोर्ट के बाद 24 फरवरी 2018 को जिला प्रोवेजनल अधिकारी ने इस संस्था को बंद करने का आदेश दे दिया।

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