सिरमौर में माघी पर्व के उपलक्ष्य पर करीब चार करोड़ के बकरे कटने का अनुमान

ख़बरें अभी तक। हिमाचल के लगभग सभी जिलों में माघी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन सिरमौर जिले में माघी पर्व मनाने की परम्परा अनूठी है, जो यहां की समृद्ध संस्कृति को दर्शाती है।सिरमौर के गिरिपार इलाके में शुक्रवार से माघी उत्सव शुरू हो गया जो 2 दिनों तक चलता है। पारंपारिक पकवानों की खुशबू से गिरिपार की वादियां आजकल महक उठी हैं,

किन्तु बिड़वना ये है कि माघी पर्व के उत्सव पर यहां बकरों का मांस पकाए जाने की प्रथा है। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरिपार की सौ से अधिक पंचायतों में माघी पर्व पर लगभग चार करोड़ रुपये से अधिक के बकरे काटे जाएंगे। गिरिपार क्षेत्र में करीब 137 पंचायतें आती हैं। इलाके की आबादी पौने तीन लाख है, जबकि परिवारों की संख्या लगभग 40 हजार। इस हिसाब से 40 हजार बकरे कटेंगे।

इस पर्व को मनाने की परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है। हाटी समिति के महामंत्री कुंदन शास्त्री ने बताया कि गिरिपार के लगभग 95 फीसदी परिवार माघी पर्व पर बकरे काटते हैं। जो परिवार शाकाहारी हैं वे बकरे नहीं काटते। गिरिपार क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उतराखंड के जौनसार बाबर में भी माघी पर्व मनाने की परंपरा है। पर्व पर गिरिपार क्षेत्र का हर व्यक्ति अपने घर में मौजूद रहता है। माघी पर्व के अगले दिन  सभी घरों में पहाड़ी व्यंजन उलौले, तेलपाक्की और बडोली बनाई जाती है। जबकि दूसरे दिन से बकरों के काटने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस दिन बाकायदा महाकाली की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

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